आज तड़के सुबह की याद ज़ेहन में मेरे हंसी पैदा कर रही है,
देखा जब धुंध के लिहाफे में छुपा सूरज सर्दी को भगा रही है,
में भी तनिक हैरान था,
कंप कापते कदमो में ऑफिस के लिए परेशान था,
समझ न सका जो मंजर वो तो ठंड का गुमान था !
सोचा टेहर के कहीं चाय की चुस्की ले लू ,
फिर अपनी थोड़ी सी गर्मी सूरज को दे दू ,
पर सूरज बेचारा बस धुंध से परेशान था,
धुंध से परेशान था...... !!
देखा जब धुंध के लिहाफे में छुपा सूरज सर्दी को भगा रही है,
में भी तनिक हैरान था,
कंप कापते कदमो में ऑफिस के लिए परेशान था,
समझ न सका जो मंजर वो तो ठंड का गुमान था !
सोचा टेहर के कहीं चाय की चुस्की ले लू ,
फिर अपनी थोड़ी सी गर्मी सूरज को दे दू ,
पर सूरज बेचारा बस धुंध से परेशान था,
धुंध से परेशान था...... !!
thand m dhup ka intzaar sabko hota h ....par thand s kaapta suraj ki laachari kisi ne n dekhi ...aapne dekha aur usko alfaaz v diye...bahut khub..
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